Our Story

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“आज क्या लिख रही हो?” “कुछ नहीं।” “कुछ नहीं कैसे? कुछ लिख तो रही हो। मुझे आवाज़ आ रही है, क़लम की नोख़ का पन्ने पे घिसने का…” “हम्म..” “अरे पढ़ के बताओ तो।” “नहीं…” “पर क्यों?” “हमारी कहानी का अंत लिख रही हूँ, बाद में सुन लेना।” “अंत अभी हुआ नही, तुम लिख कैसे …